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C. Person : KUMAR AJAY
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E-Mail ID : samvadias9891@gmail.com
 

Hindi Sahitya

 

हिंदी साहित्य (ऐक्छिक विषय)

1   “हिंदी साहित्य” क्योँ?

हिंदी साहित्य संक्षिप्त, भरोसेमंद, अंकदायी एवं श्रेष्ठ वैकल्पिक विषय है|

Ø  हिंदी साहित्य (500 अंक ) मे 60% से आधिक अंक, कम समय एवं श्रम में प्राप्त कर सकते हैं |

Ø  निबंध (250 अंक) में उपोयोगी है |

Ø  कॉम्प्रिहेंशन (CSAT) में उपयोगी है |

Ø  सामान्य हिंदी (300 अंक) में उपयोगी|

Ø  भाषा पर पकड़, लेखन क्षमता का विकास होता है |

Ø  सम्प्रेषण क्षमता |

Ø  साक्षात्कार में उपयोगी |

Ø  सामान्य अध्यन में भाषा एव शब्द प्रबंधन से अप्रत्यक्ष रूप से 10% लाभ अंको के रूप में|

 

मुख्य विषय के रूप में, हिंदी साहित्य की लोकप्रियता प्रशासनिक परीक्षाओं (सिविल & स्टेट PCS) में लगातार बढ़ रही है यह सच है की चयनात्मक अध्ययन का विकल्प भी इसे अन्य विषयो की तुलना प्रासंगिक बनाता है विषय की रोचकता के साथ ही परीक्षा हेतु “माध्यम” (भाषा) की समस्या का नहीं होना, ‘हिंदी साहित्य’ प्रासंगिकता को प्रमाणित करता है| अंग्रेजी माध्यम के छात्र भी (IIT, मेडिकल साइंस ) हिंदी साहित्य में सर्वाधिक अंक प्राप्त करते हैं | सफलता अनुपात अपेक्षाकृत अन्य विषयों से काफी बेहतर है | हिंदी में औसत प्राप्त अंक 55% है| अन्य विषय में औसत अंक 40-45% हैं | तुलनात्मक रूप से मात्र 4 माह में सर्वाधिक अंक (300 से आधिक) प्राप्त कर सकते हैं | प्रारंभ से ही सामान्यता: उच्च स्थान प्राप्त छात्रों का एक वैकल्पिक विषय ‘हिंदी साहित्य’ रहा है|

संवाद IAS संस्थान के ही छात्र श्री गंगा सिंह (IAS) ने 315 अंक (33वी रैंक ), आरती सिंह (IPS) में 310 अंक तथा प्रमोद यादव (IPS) ने 305 अंक प्राप्त किया केशव कुमार (IPS) ने 289 अंक आशुतोष राय (IRS) ने 277 अंक तथा अदिति पटेल (IRPS) ने 271 अंक प्राप्त किया | ‘अजय कुमार‘ (IRS) ने 202 + 167 = 369  (62%) अंक तथा ‘अमित राजन’ ने 179 + 203  = 382  (76%) अंक प्राप्त किया है| ‘प्रमोद कुमार’ (IRS) ने विषय प्रवर्तित कर मात्र 3 माह में 332 (56%) अंक प्राप्त किये| आदेश राय ने भी 207 + 196 = 403 अंक प्राप्त कर संवाद IAS संस्थान की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया है प्रतिबद्ध मार्गदर्शन से ही ‘संवाद IAS’ ने प्रत्येक वर्ष सर्वोच्च अंक दिए है C.S. 2010-11 संजय कुमार 197+159=356 (60%) अंक, सचिन मिश्रा ने हिंदी साहित्य में 330 अंक, निबंध 129 (65%), अनूप सिंह UPPCS 266 (68%) अंक   C.S. 12-13 में भी सर्वोच्च अंक (178+156 = 334) गौरव कुमार सिंह (IIT Delhi) को प्राप्त हुए ‘पवन अग्रवाल’ (IAS) ने 2015-16 में 43वां स्थान प्राप्त किया 2016 में ‘देवी लाल’ (IAS) तथा ‘अवध पवार’ (IRS) सफल रहे| ‘हिमांशु त्रिपाठी’ ने 289 अंक प्राप्त किया (2015)

(1) चयनात्मक अध्ययन की सुविधा- पाठयक्रम का वैज्ञानिक तरीके से विभाजन तथा पिछले वर्षो में प्रश्न पूछने की प्रवृति (Trend Analysis ) के आधार पर चयनात्मक अध्ययन संभव है|

(2) प्रतिस्पर्धा ‘या’ अपेक्षाकृत कम अंक पाने का कोई खतरा नहीं है - परीक्षा का माध्यम (अंग्रेजी) तथा विषय सामग्री आदि के स्तर पर अन्य मुख्य विषयों में प्रतिस्पर्धा तो रहती ही है साथ ही अपेक्षाकृत कम अंक पाने का खतरा भी रहता है| परन्तु “हिंदी साहित्य” में माध्यम सम्बन्धी खतरा नहीं है | अंग्रेजी माध्यम के ही छात्र हिंदी साहित्य में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर रहे हैं |

2. हिंदी साहित्य: कैसे पढ़े?

1. भाषा विज्ञान अति सरल एवं अंकदायी  है जिसे मात्र 10-12 दिनों में Concept के साथ तैयार किया जा सकता है| रटने की जगह, इसे समझने का प्रयास करे|

2.“साहित्य का इतिहास” खण्ड में विशेषताओं एवं प्रवृतियों को बदलते सन्दर्भों में समझना है:-

·        कालगत परिवर्तन कब हुआ है?

·        कालगत परिवर्तन क्यों है?

·        क्या परिवर्तन हुए हैं?

·        सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक सन्दर्भों के बदलते सन्दर्भों से तुलना करें |

·        भाषा एवं शैली में क्या परिवर्तन हुए हैं ?

·        विशेषताओ हेतु (प्रमाण स्वरूप) कुछ कविताएँ भी जाननी हैं |

3.पद्य खण्ड- सिविल सेवा के हिंदी साहित्य (द्वितीय पत्र) के पाठ्यक्रम में कुल 12 कवि तथा उनकी कुछ कविताओ का अध्ययन करना है| (कवितायेँ  न रटनी  है और न पूरी लिखनी है)| इन 12 कवियों का अध्ययन निम्न प्रकार से करना है-

·        भक्तिकालीन कवि (1350 – 1650 ई. )- कबीर, जायसी, सूरदास, तुलसीदास

·        रीतिकाल कवि (1650-1850 ई.) बिहारी

·        नवजागरण एवं छायावाद के कवि- मैथिलीशरण गुप्त, जयशंकर प्रसाद तथा निराला

·        छायावादोत्तर कवि

·        रामधारी सिंह दिनकर

·        नागार्जुन

·        सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

·        मुक्तिबोध

इन 12 कवियों में से, 5 व्याख्या (10*5=50 अंक) के प्रश्न रहते हैं जो अभ्यास से काफी सरल हो जाते हैं | द्वितीय पत्र में तीन प्रश्न पद्य खण्ड से हल करना (50*3=150 अंक), अधिक सरल है तथा अंकदायी भी है | यहाँ ध्यान रखना है की-

·        कवि एवं कविता किस काल के हैं?

·        समस्या एवं संवेदना पक्ष क्या हैं?

·        समाधान पक्ष क्या हैं?

·        भाषा, शैली, शिल्प योजना क्या है?

·        प्रासंगिकता क्या हैं? (21वी सदी, रचनाकाल तथा भविष्य के आधार पर)

 

4. गद्य खण्ड:- इस खण्ड में निम्न पाठ्यक्रम है-

(1) उपन्यास          गोदान, 1936, प्रेमचंद

                            दिव्या, 1945, यशपाल

                            मैला आँचल 1954 फणीश्वर  नाथ ‘रेंणु ’

                            महाभोज 1979, मन्नू भंडारी

(2) कहानी संग्रह      प्रेम मंजुषा (प्रेमचंद)

                             एक दुनिया समानांतर (राजेन्द्र यादव)

(3) नाटक               भारत दुर्दशा, 1880, भारतेंदु हरिश्चंद

                             स्कंदगुप्त, 1927, जयशंकर प्रसाद

                             आषाढ़ का एक दिन, 1958, मोहन राकेश

(4) निबंध                चिंतामणि भाग-1 (2 निबंध) रामचंद्र शुक्ल

                               निबंध निलय- डॉ. सत्येंद्र

(5) आलोचना का उदभव और विकास

गद्य खण्ड से भी 5 व्याख्या के प्रश्न (10*5=50 अंक) आते है जिसे टेस्ट सीरीज एव अभ्यास से आसान बनाया जा सकता है| तुलनात्मक रूप से नाटक सर्वाधिक अंकदायी एवं सरल भी है| इसके बाद उपन्यास एवं कहानी पर अधिक बल  दिया जाना उचित है |

समग्रत: यह कहा जा सकता है की हिंदी साहित्य तुलनातमक रूप से अन्य विषयों की तुलना में सरल-संक्षिप्त  तथा अंकदायी है सामान्य अध्ययन तथा अन्य वैकल्पिक विषय जैसे इतिहास, लोकप्रशान, भूगोल, दर्शनशास्त्र के परीक्षक अंग्रेजी माद्यम के होते हैं जिनसे हिंदी मध्याम के छात्रों को अंको प्राप्त करने में समस्या आती है? परंतू हिंदी साहित्य विषय रखने से अंग्रेजी माध्यम से प्रतिस्पर्धा ही समाप्त हो जाती है?

हिंदी साहित्य से भाषा एव लेखन क्षमता में निरंतर विकास होता है इसमें प्रत्यक्ष रूप से निबंध में तथा अप्रत्यक्ष रूप से सामान्य अध्ययन में लाभ मिलता है| अंग्रेजी माध्यम के अधिकांश विद्यर्थी हिंदी साहित्य का चयन इसलिए करते हैं; कि उन्हें अद्धिक अंक प्राप्त हो सके|

3. अधिकतम अंक कैसे प्राप्त करे?

प्रथम पत्र:

प्रथम पत्र दो खंडो में होता है, जिसमे 1 एव 5 वां प्रश्न अनिवार्य होता है| प्रथम खण्ड में ४ प्रश्न तथा दुएत्ये खण्ड में 4 प्रश्न होते है जिनमे से कुल 5 प्रश्नों के उत्तर देने होते है यदि आप प्रथम खण्ड से 3 प्रश्न (50*3 = 150 अंक) तथा दुतियी खण्ड से 2 प्रश्न (50*2 = 100 अंक), हल करते है तो तुलनात्मक रूप से आधिक अंक प्राप्त कर सकते है|

इसका कारण यह है की भाषा विज्ञान (विज्ञान खण्ड), तथ्य परक तथा आसान होता है लगभग 16 प्रश्न तैयार कर लेने पर (कुमार ‘अजय’ सर दुअरा बताया जाएगा) आप 150 अंक हेतु आश्वस्त हो सकते है| (भाषा विज्ञान में) इसमें गलत धारणा है कि भाषा विज्ञान, रटना होता है| रटना होता है| रटना अताकिर्क है| यह परेशानी तभी आती है जब शिक्षक दुआर इसे पढाया नहीं जाता या छात्र एव शिक्षक के बीच प्रत्यक्ष संवाद (लाइव क्लास ) नहीं होता| केवल 10-12 दिन में, 150 अंक की तेयारी, हिंदी साहित्य में आधिकतम अंक लाने का प्रमुख आधार हो सकता है|

साहित्य के इतिहास में कोंसेप्ट के साथ विशेषताओं प्रवृतियों को तार्किक आधारों पर समझना होता है| यहाँ भी रटना, अताकिर्क एवं अवैज्ञानिक अध्ययन को बताता है|

द्वितीय पत्र:- 

प्रश्न 1 (पद्य खण्ड) एवं प्रश्न 5 (गद्य खण्ड) में व्याख्या करनी होती है| इस प्रकार व्याख्या 10 होती है| (10*10=100 अंक)| यह लेखन एवं कोंसेप्ट का व्यवाहिरक पक्ष है, जिसमे 65% से भी अधिक अंक प्राप्त कर सकते हैं | सामान्यत: यह शिकायत रहती है की छात्र, अच्छी व्याख्या नहीं कर पाते हैं | यह समस्या आपको तभी आती है जब कक्षा में व्याख्या पर ध्यान नहीं दिया जाता है| संवाद IAS में कुमार ‘अजय’ सर के द्वारा ही 30 से अधिक व्याख्या लिखवाई जाती है, जिससे व्याख्या आपके लिए आसान महसूस होती है|

समग्रत: यदि आपने ‘भाषा विज्ञान’ (150 अंक ) तथा ‘व्याख्या’ (100 अंक) की अच्छी तैयारी की है (कुल 250 अंक) तो आप हिंदी साहित्य में सहज रूप से 60% अंक प्राप्त कर सकते हैं| 250 अंक की तेयारी हेतु 20-25 दिन पर्याप्त हैं | सामान्यत: अध्यापन के दौरान इसे नज़रअंदाज कर दिया जाता है, परन्तु संवाद IAS में कुमार ‘अजय’ सर द्वारा इस पर व्यक्तिगत ध्यान दिया जाता है, जिसके कारण लगभग विगत एक दशक से सर्वोच्च अंक यहाँ के छात्रों को प्राप्त हुए हैं|

यदि आप संवाद IAS के नियमित छात्र नहीं भी हैं तब भी कार्यालय से समय लेकर कुमार ‘अजय’ सर से व्यक्तिगत समस्याओं (भाषा विज्ञान तथा व्याख्या में) का समाधान प्राप्त कर सकते है|

4. व्याख्या कैसे करें ?

IASPCS परीक्षा (हिंदी साहित्य) में व्याख्या की चुनौती का समाधान

व्याख्या: समस्या –समाधान

व्याख्या कैसे करे?

क्या कठिनाई आती हैं?

क्या एवं कैसे पढ़े?

किस खण्ड से व्याख्या अन्क्दायी एवं सरल हैं?

आप हिंदी साहित्य में अधिक अंक (500 अंक में 300 से भी आधिक) प्राप्त कर सकते हैं, जिसका मुख्य आधार भाषा विज्ञान (3 प्रश्न, 150 अंक) तथा व्याख्या (100 अंक) भी है| व्याख्या में औसत रूप से IASPCS की परीक्षा में 60% से अधिक अंक मिलते हैं | हिंदी साहित्य के द्वितीय पत्र का पाठ्क्रम निम्न हैं, जिसमे व्याख्या के प्रश्न रहते हैं |

12 कवि: 5 मध्यकालीन कवि एवं ७ आधुनिक कवि

3 उपन्यास

2 कहानी संग्रह

3 नाटक

2 निबंध संग्रह

IAS की परीक्षा में पद्य संग्रह से कुल 5 तथा गद्य संग्रह से कुल 5 व्याख्या (10*10=100 अंक) पूछी जाती है|

समस्याएं

समस्या- 1 ‘सन्दर्भ ’ लिखने में      कहाँ से, किसकी रचना है? किस रचना का भाग हैं?

समस्या-2 प्रसंग लिखने में      किसका कथन है? किन परिस्थितियों में है? किनके बीच संवाद है?

‌‍ स्मरणीय  है की सन्दर्भ एवं प्रसंग की यदि पूरी जानकारी नहीं है तो गलत जानकारी नहीं दे| नहीं लिखने के लिए उतनी सजा नहीं मिलती जितनी गलत लिखने के लिए| अत: सदैव जितना सत्य ज्ञात हो, उतना ही लिखे|

समाधान यह है की आप इस तरह लिख सकते हैं- (नहीं जानने पर)

·        पंक्तियाँ मध्यकालीन कविकविता की है|

·        पंक्तियाँ आधुनिक कविकविता में संकलित है|

·        यह नाटकीय संवाद खड़ी बोली हिंदी में है|

·        कथा साहित्य में संकलित पंक्तियां रचनाकार की साहित्य प्रतिभा का प्रमाण है|

संदर्भ एवं प्रसंग न जानने की समस्या तभी उत्पन्न होती है जब-

·        सम्पूर्ण मूल पाठ नहीं पढ़ा हो|

·        शिक्षक एवं छात्र के बीच प्रत्यक्ष संवाद, अध्यापन के दौरान न हो|

·        मूल पाठ की संवेदना तथा भाषा का पूर्ण ज्ञान न हो|

समस्या-3 भाव सौंदर्य लिखने में?

पद्य की व्याख्या में प्रथमत; सरल अर्थ लिखते है तथा बाद में विशेष अर्थ एवं तुलना| गद्य की व्याख्या में मुख्य विचार सूत्र पर ध्यान देकर विशेष अर्थ एवं तुलना लिखते हैं |

सरल अर्थ का आशय क्या है? क्या कहा गया है?

विशेष अर्थ का आशय क्या है प्रिशात्भूमि, समस्या, प्रेद्दस्रूठ, विचार, चिंतन, उद्देश्य एव समान पक्ष क्या है?

तुलना: विचार एवं भाव से की जाती है | अत: आप उसी रचनाकार की पंक्तियों से, या अन्य किसी भी रचनाकार एवं विचारक की पंक्तियों से कर सकते है| किसी भी भाषा की रचना, या लोकोकित से भी तुलना ही जा सकती है| यह तुलना व्याख्येय पंक्तिया की पूर्ण समझ का प्रमाण होती है जिससे अधिक अंक की प्राप्ति होती है|

समस्या 4:- शिल्प सौंदर्य लिखने में?

विचार भाव या संवेदना को अभिव्यक्ति देने वाले साहित्यिक उपकरण शिल्प कहे जाते है| शिल्प संरचना के मुख्य तत्व हैं -

·        भाषा

·        शब्द प्रबंधन

·        बिंब

·        प्रतीक

·        अलंकार

·        रस

·        छंद

·        लोकोक्ति

·        अभिधा लक्षणा, व्यंजना (शब्द शक्तियां)

·        मुहावरा

·        शैली  

·        नाटकीयता

·        द्वंद्वात्मकता

·        शिल्प सौंदर्य की प्राथमिक समझ हेतु आप “हिंदी भाषा एवं साह्तिय के साथ प्रथम संवाद” नामक पुस्तक (नव संवाद प्रकाशन) की मदद ले सकते है| ‘प्रश्न पत्र प्रारूप (question bank) प्रतिदिन देखे|

समस्या 5 :- प्रासंगिक लिखने में

यह संकेतों में यह बताने की कोशिश करे की प्रासंगिकता के तीन सन्दर्भ होते हैं-

रचनाकाल के संदर्भ में

वर्तमान के संदर्भ में

भविष्य के संदर्भ में

यहाँ आप current news  या  views से भी प्रासंगिकता के बिन्दुओं को जोड सकते है| इससे नवीनत एवं मौलिकता का बोध होता है, जिससे अधिक अंक प्राप्ति की संभावना बढ़ जाती है|

(क)   क्या संदर्भ, प्रसंग, भावसौन्दर्य , शिल्प सौन्दर्य एवं प्रासंगिकता आदि उपशीर्षक के साथ लिखना चाहिए?

(ख)  क्या शीर्षक न देकर भी लिखा जा सकता है?

व्याख्या लिखते समय किसी भी शैली को सुविधानुसार अपनाया जा सकता है क्योंकि कोई एक प्रकार से लिखना अनिवार्य नहीं है| पैराग्राफ में परिवर्तन से यह सहज स्पष्ट हो जाता है की आपने इस क्रम का ध्यान रखा है| कुल 10  व्याख्या में कुछ प्रथम पद्धति से तथा कुछ द्वितीय पद्धति से या अपनी सुविधा अनुसार लिखने का प्रयास करे?

निष्कर्ष यह है की व्याख्या भी लेखन शैली का अनिवार्य अंग है| प्रत्येक पाठ से कुछ व्याख्या लिखकर अपने शिक्षक या मार्गदर्शक से ईमानदारी के साथ जांच कराएं, जिससे क्रमिक सुधार हो| सामान्यत: आप इस खण्ड में 60% से अधिक अंक प्राप्त कर सकते है|

Paper-I

Answers must be written in Hindi.

Section-A

1.History of Hindi Language and Nagari Lipi.

I. Grammatical and applied forms of Apbhransh, Awahatta & Arambhik Hindi.

II. Development of Braj and Awadhi as literary language during medieval period.

III. Early form of Khari-boli in Siddha-Nath Sahitya, Khusero, Sant Sahitaya, Rahim etc. and Dakhni Hindi.

IV. Development of Khari-boli and Nagari Lipi during 19th Century.

V. Standardisation of Hindi Bhasha & Nagari Lipi.

VI. Development of Hindi as national Language during freedom movement.

VII. The development of Hindi as a National Language of Union of India.

VIII. Scientific & Technical development of Hindi Language.

IX. Prominent dialects of Hindi and their inter relationship.

X. Salient features of Nagari Lipi and the efforts for its reform & Standard form of Hindi.

XI. Grammatical structure of Standard Hindi.

Section-B

2. History of Hindi Literature.

I. The relevance and importance of Hindi literature and tradition of writing History of Hindi Literature.

II. Literary trends of the following four periods of history of Hindi Literature.

A : Adikal-Sidh, Nath and Raso Sahitya.

Prominent poets-Chandvardai, Khusaro, Hemchandra, Vidyapati.

B : Bhaktikal-Sant Kavyadhara, Sufi Kavyadhara, Krishna Bhaktidhara and Ram Bhaktidhara.

Prominent Poets-Kabir, Jayasi, Sur & Tulsi.

C: Ritikal-Ritikavya, Ritibaddhakavya & Riti Mukta Kavya.

Prominent Poets-Keshav, Bihari, Padmakar and Ghananand.

D : Adhunik Kal

a. Renaissance, the development of Prose, Bharatendu Mandal.

b. Prominent Writers : Bharatendu, Bal Krishna Bhatt & Pratap Narain Mishra.

c. Prominent trends of modern Hindi Poetry : Chhayavad, Pragativad, Proyogvad, Nai Kavita, Navgeet and Contemporary poetry and Janvadi Kavita.

Prominent Poets : Maithili Sharan Gupta, Prasad, Nirala, Mahadevi, Dinkar, Agyeya, Muktibodh, Nagarjun.

III. Katha Sahitya

A. Upanyas & Realism

B. The origin and development of Hindi Novels.

C. Prominent Novelists : Premchand, Jainendra, Yashpal, Renu and Bhism Sahani.

D. The origin and development of Hindi short story.

E. Prominent short Story Writers : Premchand, Prasad, Agyeya, Mohan Rakesh & Krishna Shobti.

IV. Drama & Theatre

A. The origin & Development of Hindi Drama.

B. Prominent Dramatists : Bharatendu, Prasad, Jagdish Chandra Mathur, Ram Kumar Verma, Mohan Rakesh.

C. The development of Hindi Theature.

V. Criticism

A : The origin and development of Hindi criticism : Saiddhantik, Vyavharik, Pragativadi, Manovishleshanvadi & Nai Alochana.

B : Prominent critics : Ramchandra Shukla, Hajari Prasad Dwivedi, Ram Vilas Sharma & Nagendra.

VI. The other forms of Hindi prose-Lalit Nibandh, Rekhachitra, Sansmaran, Yatra-vrittant.

Paper-II

Answers must be written in Hindi.

This paper will require first hand reading of prescribed texts and will test the critical ability of the candidates.

Section-A

1. Kabir : Kabir Granthawali, Ed, Shyam Sundar Das (First hundred Sakhis.)

2. Surdas : Bhramar Gitsar, Ed. Ramchandra Shukla (First hundred Padas)

3. Tulsidas : Ramchrit Manas (Sundar Kand) Kavitawali (Uttar Kand).

4. Jayasi : Padmawat Ed. Shyam Sundar Das (Sinhal Dwip Khand & Nagmativiyog Khand)

5. Bihari : Bihari Ratnakar Ed. Jagnnath Prasad Ratnakar (First 100 Dohas)

6. Maithili Sharan Gupta : Bharat Bharati

 7. Prasad : Kamayani (Chinta and Sharddha Sarg)

8. Nirala : Rag-Virag, Ed. Ram Vilas Sharma (Ram Ki Shakti Puja & Kukurmutta).

9. Dinkar : Kurushetra

10. Agyeya : Angan Ke Par Dwar (Asadhya Vina)

11. Muktiboth : Brahma Rakshas

12. Nagarjun : Badal Ko Ghirte Dekha Hai, Akal Ke Bad, Harijan Gatha.

Section-B

1. Bharatendu : Bharat Durdasha

2. Mohan Rakesh : Ashad Ka Ek Din

3. Ramchandra Shukla : Chintamani (Part I)

(Kavita Kya Hai] Shraddha Aur Bhakti)

4. Dr. Satyendra : Nibandh Nilaya-Bal Krishna Bhatt, Premchand, Gulab Rai, Hajari Prasad Dwivedi, Ram Vilas Sharma, Agyeya, Kuber Nath Rai.

5. Premchand : Godan, Premchand ki Sarvashreshtha Kahaniyan, Ed. Amrit Rai, Manjusha - Premchand ki Sarvashreshtha Kahaniyan, Ed. Amrit Rai

6. Prasad : Skandgupta

7. Yashpal : Divya

8. Phaniswar Nath Renu : Maila Anchal

9. Mannu Bhandari : Mahabhoj

10. Rajendra Yadav : Ek Dunia Samanantar (All Stories)

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